भारत में कार्यकारी अधिकार का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रीमंडल द्वारा किया जाता हैं, जो सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी होता हैं। इस प्रणाली में कुछ विषयों से जुड़े कार्यभार को कुछ मंत्रालयों को सौंप दिया जाता हैं, जो एक मंत्री के अधीन होते हैं। मंत्रालयों को कामकाज की सुगमता के लिए विभागों में विभाजित किया जाता हैं। विभागों को स्वतंत्र प्रभार के तहत या राज्य मंत्री के रूप में प्रशासित किया जाता हैं। विभागों के अतिरिक्त बहुत सारी संस्थाएं, संगठन, संस्थान, एजेंसी आदि कई इकाइयां भी होती हैं, जो मंत्रालय को अपने कामकाज का निर्वहन करने में सहायता करती हैं। मंत्रालयों में समय-समय पर संरचनात्मक परिवर्तन होते रहते हैं, जिससे इनकी संख्या घटती और बढती रहती हैं। 

मंत्रीमंडलीय प्रणाली

यह प्रणाली किस प्रकार कार्य करती हैं, इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं। केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों की रुपरेखा इस प्रकार हैं।
  • सीधे कैबिनेट मंत्री के अधीन मंत्रालय : कुछ मंत्रालय सीधे कैबिनेट मंत्री के अधीन होते हैं। जो कैबिनेट की बैठकों में भाग लेते हैं। अपने मंत्रालय के निर्णय लेने में अहम् भूमिका निभाते हैं। 
  • राज्य मंत्री (Minister of state : MOS) : जिन मंत्रालयों में कई विभाग होते हैं, उनमे मंत्री की सहायता के लिए राज्य मंत्री बनाए जाते हैं। ये कैबिनेट मंत्री के अधीन कार्य करते हैं। इसलिए जब तक विशेष आवश्यकता नही हो, तब तक कैबिनेट की बैठकों में भी भाग नही ले पाते हैं।
  • संसदीय सचिव (Parliamentary secretary) : ये भी किसी मंत्री की सहायता के लिए किसी मंत्रालय या विभाग से जोड़े जाते हैं। इनकी नियुक्ति का प्रयोजन सदस्य को मंत्रालयों का कामकाज सीखाकर भावी मंत्री बनने का प्रशिक्षण देना होता हैं।  हालाँकि नियुक्ति में राजनितिक समीकरण भी निहित होते हैं।   
  • स्वतंत्र प्रभार (Independent Charge) : कुछ मंत्रालयों को विशेषज्ञ आवश्यकता के कारण सृजित किया गया हैं, लेकिन उनकी केबिनेट में जरुरत ज्यादा प्रतीत न होने पर उन्हें किसी राज्य मंत्री के अधीन स्वतंत्र प्रभार के तहत रख दिया जाता हैं। जो प्रधानमंत्री कार्यलय के माध्यम से कैबिनेट में अपनी बात रखते हैं, कई बार इनको भी उसमे आमंत्रित किया जाता हैं। 

प्रधानमंत्री द्वारा प्रशासित मंत्रालय
इसके अतिरिक्त जिन विभागों और मंत्रालयों को किसी अन्य को आवंटित नही किया जाता हैं, उनका कार्यभार  स्वंय प्रधानमंत्री द्वारा देखा जाता हैं। साथ ही कुछ मंत्रालयों/ विभागों को प्रधानमन्त्री के अधीन ही परम्परागत रूप से रखा जाता रहा हैं, जैसे कि :  
  1. Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions;
  2. Department of Atomic Energy;
  3. Department of Space; 
  4. All important policy issues; and
  5. All other portfolios not allocated to any Minister.
  6. Minister of State in the Prime Minister’s Office;